BREAKING NEWS
विश्व प्रेस दिवस: स्वतंत्रता और दुरुपयोग के बीच संतुलन की चुनौती अंतर्राष्ट्रीय हिन्दू परिषद के अध्यक्ष डाक्टर प्रवीण भाई तोगड़िया का दो दिवसीय नगर आगमन सुप्रीम कोर्ट से पवन खेड़ा को बड़ी राहतमिली अग्रिम जमानत जब न्याय सत्ता से टकराया: न्यायमूर्ति हंस राज खन्ना की कहानी” राज्य साइबर पुलिस  की बड़ी कार्रवाई: साइबर ठगी का कॉल सेंटर ध्वस्त, आरोपी गिरफ्तार केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया; विकसित भारत 2047 की दिशा में बड़ा कदम, देश छुएगा नई ऊँचाइयाँ । सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर लगाई रोक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्ष की राष्ट्रसेवा यात्रा पर प्रमुख जनगोष्ठी आयोजित विदिशा में कड़ाके की ठंड के चलते कक्षा 5वीं तक के स्कूलों में अवकाश घोषित 12 एकड़ में देश का सबसे बड़ा नवग्रह मंदिर तैयार, फरवरी में प्राण प्रतिष्ठा अमेरिका ने वेनेजुएला में बड़ा ऑपरेशन किया, राष्ट्रपति मादुरो हिरासत में रोहिणी आचार्य ने परिवार और पार्टी नेताओं पर लगाए गंभीर आरोप India vs Australia Women’s World Cup Semifinal: भारत की ऐतिहासिक जीत Best fashion news of November 2022 Ronaldo makes history as Brazil join the party

12 एकड़ में देश का सबसे बड़ा नवग्रह मंदिर तैयार, फरवरी में प्राण प्रतिष्ठा

डबरा, ग्वालियर

एशिया का सबसे बड़ा और अद्भुत नवग्रह मंदिर ग्वालियर जिले के डबरा में तैयार हो गया है। यह मंदिर इसलिए विशेष माना जा रहा है क्योंकि यहां नवग्रह अपनी पत्नियों के साथ विराजमान हैं। 12 एकड़ भूमि पर केवल मंदिर परिसर का निर्माण किया गया है। अगले महीने 11 से 20 फरवरी के बीच मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा प्रस्तावित है।

मंदिर का निर्माण सनातन धर्म परंपरा वास्तु शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र के सिद्धांतों के आधार पर किया गया है। पूरे परिसर में 108 खंभे स्थापित किए गए हैं। हिंदू धर्म में 108 अंक का विशेष महत्व माना जाता है। वैदिक मान्यताओं के अनुसार 27 नक्षत्र होते हैं और प्रत्येक नक्षत्र की चार दिशाएं मानी जाती हैं। इस प्रकार 27 गुणा 4 करने पर 108 की संख्या प्राप्त होती है।

मंदिर में नवग्रहों की स्थापना गहन अध्ययन के बाद की गई है। सभी ग्रहों और उनके मंदिरों को इस प्रकार स्थान दिया गया है कि वे एक दूसरे के सामने न आएं। सूर्य देव की स्थापना के साथ उनके तेज को नियंत्रित करने के लिए जल की विशेष व्यवस्था की गई है। इसके लिए मंदिर के चारों ओर तालाब नालियां और झरोखे बनाए गए हैं।

मंदिर तीन तलों में निर्मित है। भू तल पर आठ ग्रहों की संगमरमर की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। प्रथम तल पर मुख्य रूप से सूर्य देव की अष्टधातु की प्रतिमा उनकी दो पत्नियों के साथ विराजमान है। प्रवेश द्वार पर सात अश्व सफेद संगमरमर से बनाए गए हैं। अन्य ग्रह भी अपनी पत्नियों के साथ अष्टधातु की रंगीन प्रतिमाओं के रूप में स्थापित हैं। द्वितीय तल पर ग्रहों से जुड़े देवताओं को स्थान दिया गया है।

परिसर में मंदिर के बराबर क्षेत्रफल में एक सरोवर भी बनाया गया है। सरोवर का जल मंदिर की परिक्रमा करता हुआ पुनः सरोवर में लौटता है। मान्यता है कि जल सूर्य की ऊर्जा को संतुलित करता है। इसी ज्योतिषीय तर्क के आधार पर यह व्यवस्था की गई है।

मंदिर का निर्माण द्रविड़ शैली में किया गया है। इसके आर्किटेक्ट अनिल शर्मा के अनुसार द्रविड़ शैली में बने मंदिरों की विशेषता उनका विशाल प्रांगण ऊंची संरचना और पिरामिडनुमा शिखर होती है। परिसर में जलाशय गोपुरम दीप स्तंभ और ध्वज स्तंभ की भी व्यवस्था की गई है।

नवग्रह मंदिर के निर्माण से डबरा क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर उभर कर सामने आया है। ग्वालियर से ओरछा जाने वाले मार्ग पर स्थित यह मंदिर अब दतिया पीतांबरा पीठ और ओरछा के साथ एक प्रमुख धार्मिक सर्किट का हिस्सा बनता जा रहा है।

Scroll to Top